बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ निबंध। Beti bachao beti padhao essay। Beti bachao beti padhao nibandh।

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 बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ निबंध। Beti bachao beti padhao essay in hindi। Beti bachao beti padhao nibandh।

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आजकल हर जगह हमें 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' की आवाज सुनाई देती है। साथ ही साथ जगह जग हमें इसके स्लोगन लेखन ओर पोस्टर चिपके दिखाई देते है। आखिर इस नारे की जरूरत पड़ी ही क्यों है? जहा एक तरफ़ तो यहां नारी को , बेटियों को पूजा जाता है। वही दुसरी तरफ उन्हें बचाने की बात की जाती है। एक तरफ़ नारियां जहां देवी बनकर राक्षसों का संहार करती है, विद्या की देवी बनती है, मां के रुप में संसार की रचनाकार है, आज के युग में जहां बराबर की हिस्सेदारी में खड़ी है। फिर क्यों उसे हीन भावना से देखा जाता है। आखिर क्यों दिन प्रतिदिन भारत में लिंगानुपात कम होता जा रहा है। क्यों बेटियों को गर्भ में ही मार दिया जाता है। आज के इस युग में इन कारणों पर गहन अध्ययन की आवश्यकता है।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की जरूरत

आज के युग में किसी भी मा बाप के लिए अपनी बेटी की परवरिश करना चुनौती पूर्ण होता जा रहा है। दिन प्रतिदिन यौन अपराधों की संख्या ज्यादा होती जा रही है। वही भारत की सबसे बड़ी बुराई है कि लोग यहां पर बेटों कि मांग करते है। वे बेटियों को अकसर गर्भ में मार देते है। उनके लिए मुश्किल हो जाता है कि कैसे वे एक बेटी की रक्षा कर पाएंगे,किस तरह से उसके विवाह पर वे दहेज दे पाएंगे। ।

बेटियों के लिए क्या करना चाहिए

दूसरा सबसे बड़ा कारण है कि बेटियों को पराया धन समझा जाता है। लेकिन असल में अगर इस बात पर गौर किया जाए तो आखिर बेटियां कहा पर दोषी पाई जाती है। दोषी तो इस समाज की गंदी सोच है। आज एक तरफ़ जहां  नारी ओर पुरुष का संतुलन बिगड़ रहा है, वहीं बेटियों की कमी से नई नई समस्याएं आ रही है। आज हमे लड़कियों को जीवन में आगे बड़ने के लिए पूरे अवसर देने चाहिए। कन्या भ्रूण हत्या ओर दहेज पर्था जैसी बीमारियों को पूर्ण रूप से खत्म करना चाहिए।

बेटी बचाओ के साथ साथ हमें बेटी पढ़ाओ की तरफ़ भी ध्यान देना चाहिए। क्योंकि शिक्षा हर किसी के लिए जरूरी है चाहे वो नारी हो या नर। लेकिन बेटियों कि शिक्षा देना ओर भी जरूरी है क्योंकि उन्हें समाज में अपना एक स्थान चाहिए होता है। कहा जाता है कि एक पढ़ी लिखी लड़की दो घरों को शिक्षित बनाती है। एक बेटी अगर शिक्षित है तो वो आगे चलकर अपने पैरों पर खड़ी हो सकती है।।

अकसर हम घरों मै देखते है कि बच्चे अधिकतर अपने मा के पास रहते है। एक माता का अपने बच्चो पर गहरा असर पड़ता है। इस प्रकार की परिस्थिति के लिए एक लड़की का पढ़ना ओर भी ज्यादा जरूरी हो जाता है। अगर हम देखे तो अनेक लड़कियों ने आगे चलकर देश में अपना नाम रोशन किया है। कल्पना चावला, किरण बेदी, सरोजिनी नायडू आदि ऐसी महिलाएं है, जिन्होंने शिक्षा के महत्व को आगे बढ़ाया है। लड़कियों को शिक्षा की तरफ़ जाने के लिए प्रेरित किया है।
बेटियां अगर पढ़ी लिखी होती है तो वे नए युग के अनुसार खुद को ढाल सकती है। समाज में व्यापत कुरीतियों को मिटा सकती है।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की शुरुआत

लगातार गिरते लिंगानुपात को ध्यान में रखते हुए 22 जनवरी 2015 को करनाल में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने इस नारे के साथ इस अभियान की शुरुआत की थी। इस अभियान के तहत गिरते लिंगानुपात को संभालना ओर बेटियों को शिक्षा की तरफ़ लाना सरकार का मुख्य उद्देश्य था। सरकार अब भी इस योजना के तहत प्रयत्नशील है। वो लड़कियों के लिए लगातार नई नई योजनाएं लाती जा रही है।

आज अगर सही मायनों में अगर देखा जाए तो बेटियों को शिक्षित बनाने के साथ साथ उन्हें विवेकी, आत्मनिर्भर ओर आत्म रक्षक बनाने की जरूरत भी है। क्योंकि अगर बढ़ते यौन अपराधों से उन्हें लड़ना है,तो उन्हे मनोबली , आत्मविश्वासी होना होगा। अगर उनके अंदर ये सब चीजें होंगी तो वो सम्मान के साथ जीवन जी सकेगी। तब बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसे नारे नी जरुरत हमें नहीं होगी।

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